भीमसेनस्य गदायुद्ध-प्रभावः
The Battlefield Impact of Bhīmasena’s Mace Combat
डी श््न अी->०त- + तलवारको मण्डलाकार घुमाना 'भ्रान्त' कहलाता है। यही अधिक परिश्रमसाध्य होनेपर “आविद्ध' कहा गया है। 'भ्रान्त' की क्रिया यदि ऊपर उठते हुए की जाय तो उसे “उदशभ्रान्त"” कहते हैं। तलवार चलाते हुए ऊपर उछलना “आप्लुत' है। सब दिशाओंमें फैलावका नाम “प्रसृत” है। तलवार चलाते हुए एक ही दिशामें आगे बढ़ना 'प्लुत” है। वेगको 'सम्पात' कहते हैं। समस्त शत्रुओंको मारने या चोट पहुँचानेके उद्यमको “समुदीर्ण” कहा गया है। पञ्चपञज्चाशत्तमो< ध्याय: अभिमन्यु और अर्जुनका पराक्रम तथा दूसरे दिनके युद्धकी समाप्ति संजय उवाच गतपूर्वाह्नभूयिष्ठे तस्मिन्नहनि भारत । रथनागाश्चवपत्तीनां सादिनां च महाक्षये,संजय कहते हैं--भारत! उस दूसरे दिन जब पूर्वाह्नका अधिक भाग व्यतीत हो गया और बहुसंख्यक रथ, हाथी, घोड़े, पैदल और सवारोंका महान् संहार होने लगा, उस समय पांचालराजकुमार धृष्टद्युम्न अकेला ही द्रोणपुत्र अश्वत्थामा, शल्य तथा महामनस्वी कृपाचार्य--इन तीनों महारथियोंके साथ युद्ध करने लगा इस प्रकार श्रीमहाभारत भीष्मपर्वके अन्तर्गत भीष्मवधपर्वमें द्वितीय युद्धादिवसमें सेनाको लौटानेसे सम्बन्ध रखनेवाला पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥/ ५५ ॥/ [दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल ४५ “लोक हैं।] ऑपनआक्राा बछ। अर: षट्पज्चाशत्तमो< ध्याय: तीसरे दिन--कौरव-पाण्डवोंकी व्यूह-रचना तथा युद्धका आरम्भ संजय उवाच प्रभातायां च शर्वर्या भीष्म: शान्तनवस्तदा । अनीकान्यनुसंयाने व्यादिदेशाथ भारत
sañjaya uvāca
prabhātāyāṃ ca śarvaryā bhīṣmaḥ śāntanavas tadā |
anīkāny anusañyāne vyādideśātha bhārata ||
Sañjaya sagte: „O Bharata (Dhritarashtra), als die Nacht zu Ende ging und die Morgenröte anbrach, erteilte Bhishma, der Sohn Shantanus, Befehle zum Aufbruch und zur geordneten Aufstellung der Heeresabteilungen.“
संजय उवाच