दानफलप्रकरणम् — उपानहदानं, तिलदानं, भूमिदानं, गोदानं, अन्नदानं च
Gifts and Their Stated Results: Footwear, Sesame, Land, Cows, and Food
सर्वकामसमायुक्तां काश्यपीं य: प्रयच्छति । सर्वभूतानि मन्यन्ते मां ददातीति वासव,इन्द्र! जो सम्पूर्ण भोगोंसे युक्त पृथ्वीका दान करता है, उसे सब प्राणी यही समझते हैं कि यह मेरा दान कर रहा है इति श्रीमहा भारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि इन्द्रबृहस्पतिसंवादे द्विषष्टितमो5 ध्याय: इस प्रकार श्रीमह्याभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें इन्द्र और बृहस्पतिका संवादविषयक बासठवाँ अध्याय पूरा हुआ
sarvakāmasamāyuktāṁ kāśyapīṁ yaḥ prayacchati | sarvabhūtāni manyante māṁ dadātīti vāsava ||
Bhishma sprach: „O Vāsava (Indra), wenn jemand die Erde verschenkt – Kāśyapī, die Welt, die alle Genüsse in sich trägt –, dann meinen alle Wesen: ‚Er schenkt mich selbst.‘“
भीष्म उवाच