Adhyāya 71: Kaca and the Saṃjīvanī-vidyā
Devayānī–Śukra Episode
काम तु मे मारुतस्तत्र वास: प्रक्रीडिताया विवृणोतु देव । भवेच्च मे मन्मथस्तत्र कार्ये सहायभूतस्तु तव प्रसादात्,देव! मैं वहाँ जाकर जब क्रीड़ामें निमग्न हो जाऊँ, उस समय वायुदेव आवश्यकता समझकर मेरा वस्त्र उड़ा दें और इस कार्यमें आपके प्रसादसे कामदेव भी मेरे सहायक हों
Kaṇva sprach: „O Gott, wenn ich dort bin und mich dem Spiel hingebe, möge Marut, der Windgott, nach Bedarf mein Gewand lüften. Und durch deine Gunst möge auch Kāma (Manmatha) mir bei diesem Werk als Helfer beistehen.“
कण्व उवाच