अग्निभय-प्रसङ्गे मन्दपालस्य शोकः
Mandapāla’s Lament amid the Threat of Fire
तब वरुणने अग्निदेवसे “अभी देता हूँ” ऐसा कहकर वह धनुषोंमें रत्नके समान गाण्डीव तथा बाणोंसे भरे हुए दो अक्षय एवं बड़े तरकस भी दिये। वह धनुष अद्भुत था। उसमें बड़ी शक्ति थी और वह यश एवं कीर्तिको बढ़ानेवाला था। किसी भी अस्त्र-शस्त्रसे वह टूट नहीं सकता था और दूसरे सब शस्त्रोंको नष्ट कर डालनेकी शक्ति उसमें मौजूद थी। उसका आकार सभी आयुधोंसे बढ़कर था। शत्रुओंकी सेनाको विदीर्ण करनेवाला वह एक ही धनुष दूसरे लाख धनुषोंके बराबर था। वह अपने धारण करनेवालेके राष्ट्रको बढ़ानेवाला एवं विचित्र था। अनेक प्रकारके रंगोंसे उसकी शोभा होती थी। वह चिकना और छिठ्रसे रहित था। देवताओं, दानवों और गन्धर्वोने अनन्त वर्षोतक उसकी पूजा की थी || ६-- ९।| रथं च दिव्याश्वयुजं कपिप्रवरकेतनम् । उपेतं राजतैरश्लै्गान्धर्वै्हिममालिभि:,इसके सिवा वरुणने दिव्य घोड़ोंसे जुता हुआ एक रथ भी प्रस्तुत किया, जिसकी ध्वजापर श्रेष्ठ कपि विराजमान था। उसमें जुते हुए अश्वोंका रंग चाँदीके समान सफेद था। वे सभी घोड़े गन्धर्वदेशमें उत्पन्न तथा सोनेकी मालाओंसे विभूषित थे
rathaṃ ca divyāśvayujaṃ kapipravaraketanam | upetaṃ rajatair aśvair gāndharvair himamālibhiḥ ||
Vaiśampāyana sprach: „Da sagte Varuṇa zum Feuergott Agni: ‘Jetzt gebe ich es’, und überreichte den Gāṇḍīva, das Juwel unter den Bögen, dazu zwei große, unerschöpfliche Köcher, bis zum Rand mit Pfeilen gefüllt. Dieser Bogen war wundersam: von gewaltiger Kraft, mehrte er Ruhm und Ehre. Keine Waffe vermochte ihn zu brechen, und in ihm lag die Macht, alle anderen Waffen zu vernichten. Seine Gestalt überragte jedes Ayudha. Dieser eine Bogen, der feindliche Heere zu spalten vermochte, galt so viel wie hunderttausend Bögen. Seltsam und erhaben, ließ er das Reich seines Trägers wachsen; er prangte in vielerlei Farben, war glatt und ohne Makel. Götter, Dānavas und Gandharvas hatten ihn durch endlose Jahre verehrt. Dazu schenkte Varuṇa einen himmlischen Wagen, mit göttlichen Rossen bespannt; auf seinem Banner stand der vornehmste Affe als Zeichen. Die Pferde waren silberweiß, im Land der Gandharvas geboren und mit Girlanden geschmückt, hell wie Schnee.“
वैशम्पायन उवाच
Extraordinary weapons and vehicles are portrayed as divinely sanctioned power; the ethical implication is that such power must be borne with restraint and used in alignment with dharma, not for vanity or aggression.
In the account narrated by Vaiśampāyana, Varuṇa bestows a celestial chariot with a monkey-emblem banner and silver-white Gandharva-bred horses, complementing the earlier gifting of the Gāṇḍīva and inexhaustible quivers.