भीमस्य जलान्वेषणं तथा वनविश्रान्तिः
Bhīma’s Search for Water and the Forest Halt
(दुःशासनं च दशभिर्विकर्ण विंशकै: शरै: | शकुनिं विंशकैस्ती&णैर्दशभिर्मर्म भेदिभि: ।। कर्णदुर्योधनौ चोभौ शरै: सर्वाज्भसंधिषु | अष्टाविंशतिभि: सर्वे: पृथक् पृथगरिन्दम: ।। सुबाहुं पञ्चभिर्विद्ध्वा तथान्यान् विविधै: शरै: । विव्याध सहसा भूयो ननाद बलवत्तरम् ।। विनद्य कोपात् पाज्चाल: सर्वशस्त्रभृतां वर: | धनूंषि रथयन्त्रं च हयांश्रित्रध्वजानपि । चकर्त सर्वपाज्चाला: प्रणेदु: सिंहसड्घवत् ।।) ततस्तु नागरा: सर्वे मुसलैर्यष्टिभिस्तदा । अभ्यवर्षन्त कौरव्यान् वर्षमाणा घना इव,उन्होंने दःशासनको दस, विकर्णको बीस तथा शकुनिको अत्यन्त तीखे तीस मर्मभेदी बाण मारकर घायल कर दिया। तत्पश्चात् शत्रुदमन द्रुपदने कर्ण और दुर्योधनके सम्पूर्ण अंगोंकी संधियोंमें पृथक्ू-पृथक् अट्ठाईस बाण मारे। सुबाहुको पाँच बाणोंसे घायल करके अन्य योद्धाओंको भी अनेक प्रकारके सायकोंद्वारा सहसा बींध डाला और तब बड़े जोरसे सिंहनाद किया। इस प्रकार क्रोधपूर्वक गर्जना करके सम्पूर्ण शस्त्रधारियोंमें श्रेष्ठ पंचालराज द्रपदने शत्रुओंके धनुष, रथ, घोड़े तथा रंग-बिरंगी ध्वजाओंको भी काट दिया। तत्पश्चात् सारे पांचाल सैनिक सिंह-समूहके समान गर्जना करने लगे। फिर तो उस नगरके सभी निवासी कौरवोंपर टूट पड़े और बरसनेवाले बादलोंकी भाँति उनपर मूसल एवं डंडोंकी वर्षा करने लगे
tatas tu nāgarāḥ sarve musalair yaṣṭibhis tadā | abhyavarṣanta kauravyān varṣamāṇā ghanā iva ||
Daraufhin stürzten alle Stadtbewohner, mit Keulen und Stäben bewaffnet, auf die Kauravas los und überschütteten sie mit Schlägen—wie regenbeladene Wolken, die sich ergießen.
वैशम्पायन उवाच
When adharma and aggression spill into public life, collective anger can erupt into mob-like retaliation. The verse hints at the ethical danger of violence spreading beyond trained warriors to ordinary citizens, destabilizing social order and multiplying harm.
After the preceding combat actions, the city’s inhabitants themselves join the attack, striking the Kauravas with clubs and staves, described as a ‘rain’ of blows like clouds pouring down.