Ballava (Bhīma) Seeks Employment as Royal Cook in Virāṭa’s Court
तं॑ राजसिंहं प्रतिगृह्य राजा प्रीत्या55त्मना चैनमिदं बभाषे | कामेन ताताभिवदाम्यहं त्वां कस्यासि राज्ञो विषयादिहागत:,“अनघ! मैं यहाँ आपके समीप रहना चाहता हूँ। प्रभो! जैसी आपकी इच्छा होगी, उसी प्रकार सब कार्य करते हुए मैं यहाँ रहूँगा।' युधिष्ठिरकी बात सुनकर राजा विराट बहुत प्रसन्न हुए और बोले--“ब्रह्मनन्! आपका स्वागत है।” तदनन्तर उन्होंने राजाओंमें श्रेष्ठ युधिष्ठिरको सादर ग्रहण किया। ग्रहण करके राजा विराटने प्रसन्न मनसे उनसे इस प्रकार कहा--“तात! मैं प्रेमपूर्वक्कत आपसे पूछता हूँ, आप इस समय किस राजाके राज्यसे यहाँ आये हैं?
taṁ rājasiṁhaṁ pratigṛhya rājā prītyātmanā cainam idaṁ babhāṣe | kāmena tātābhivadāmy ahaṁ tvāṁ kasyāsi rājño viṣayād ihāgataḥ ||
বৈশম্পায়ন বললেন— সেই রাজসিংহকে সম্মানের সঙ্গে গ্রহণ করে রাজা বিরাট স্নেহভরা চিত্তে বললেন— “বৎস, সদ্ভাবে জিজ্ঞাসা করছি— তুমি কোন রাজার রাজ্য থেকে এখানে এসেছ?”
वैशम्पायन उवाच