एतस्य हि महाबाहो व्रतमेतत् समाहितम् । यो ममाड़े व्रणं कुर्याच्छोणितं वापि दर्शयेत् । अन्यत्र संग्रामगतान्न स जीवेत् कथठ्चन,“महाबाहो! बृहन्नलाका यह निश्चित व्रत है कि जो युद्धभूमिके सिवा अन्य किसी स्थानमें मेरे शरीरमें घाव कर दे या रक्त बहता दिखा दे, वह किसी प्रकार जीवित न रहने पाये
etasyā hi mahābāho vratam etat samāhitam | yo mamāṅge vraṇaṃ kuryāc choṇitaṃ vāpi darśayet | anyatra saṅgrāmagatān na sa jīvet kathaṃcana ||
বৈশম্পায়ন বললেন—“মহাবাহো! এটাই তার দৃঢ় ব্রত—যে ব্যক্তি যুদ্ধক্ষেত্র ব্যতীত অন্য কোথাও আমার দেহে ক্ষত করে বা রক্ত দেখা দেয়, সে কোনোভাবেই জীবিত থাকতে পারবে না।”
वैशम्पायन उवाच