ते शड्खनादेन कुरुप्रवीरा: सम्मोहिता: पार्थसमीरितेन । उत्सृज्य चापानि दुरासदानि सर्वे तदा शान्तिपरा बभूवु:,अर्जुनके बजाये हुए उस शंखकी आवाजसे वे समस्त कौरव वीर मोहित (मूर्च्छित) हो गये और अपने दुर्लभ धनुषोंको त्यागककर सब-के-सब गहरी शान्ति (बेहोशी)-में डूब गये
অর্জুনের প্রেরিত সেই শঙ্খনাদে কুরুদের বীরেরা মোহিত হয়ে অচেতন হয়ে পড়ল। দুর্লভ ধনুকগুলি ফেলে দিয়ে তারা সকলেই তখন নিস্তব্ধ নৈঃশব্দ্যে নিমগ্ন হল।
वैशम्पायन उवाच