Bhīṣma–Arjuna Strategic Engagement at Virāṭa’s Frontier (भीष्मार्जुनयुद्धम्)
अभश्रृत्थाम्न: पुनर्बाणा: क्षिप्रमभ्यस्यतो रणे । जग्मुः परिक्षयं तूर्णमभूत् तेनाधिको<र्जुन:,परंतु संग्राममें शीघ्रतापूर्वक बार-बार शरसंधान करनेवाले अश्वत्थामाके बाण जल्दी समाप्त हो गये। इस कारण अर्जुन उसकी अपेक्षा अधिक शक्तिशाली सिद्ध हुए
রণক্ষেত্রে দ্রুত বারবার শরসন্ধান করতে করতে অশ্বত্থামার বাণ অচিরেই নিঃশেষ হয়ে গেল; তাই অর্জুন তার তুলনায় অধিক শক্তিমান প্রমাণিত হলেন।
वैशम्पायन उवाच