Aśvatthāman’s Admonition to Karṇa on Boasting, Varṇa-Duties, and the Threat of Arjuna
Virāṭa-parva, Adhyāya 45
उवाच पार्थो मा भैषी: प्रहस्य स्वनवत् तदा,यह सुनकर अर्जुन खिलखिलाकर हँस पड़े और बोले--“वीर! डरो मत! कौरवोंकी घोषयात्राके समय जब मैंने महाबली गन्धर्वोंके साथ युद्ध किया था, उस समय मेरा सखा या सहायक कौन था? जब देवताओं और दानवोंसे भरे हुए उस अत्यन्त भयंकर खाण्डववनमें मैं युद्ध कर रहा था, उस समय मेरा साथी कौन था?
uttara uvāca — uvāca pārtho mā bhaiṣīḥ prahasya svanavat tadā |
তখন পার্থ (অর্জুন) উচ্চহাস্যে বললেন— “বীর, ভয় কোরো না। কৌরবদের ঘোষযাত্রার সময় আমি যখন মহাবলী গন্ধর্বদের সঙ্গে যুদ্ধ করেছিলাম, তখন আমার সখা বা সহায় কে ছিল? আর দেব-দানবে পরিপূর্ণ সেই অতিভয়ংকর খাণ্ডববনে যখন আমি যুদ্ধ করছিলাম, তখন আমার সঙ্গী কে ছিল?”
उत्तर उवाच