द्रौपद्याः भीमसेन-प्रबोधनम्
Draupadī Awakens Bhīmasena
ये दद्युर्न च याचेयुर्ब्रह्म॒ण्या: सत्यवादिन: । तेषां मां मानिनीं भार्या सूतपुत्र: पदावधीत्,“जो सदा दूसरोंको देते हैं, किंतु किसीसे याचना नहीं करते, जो ब्राह्मणभक्त तथा सत्यवादी हैं, उनन््हींकी मुझ मानिनी पत्नीको सूतपुत्रने लात मारी है
ye dadyur na ca yāceyur brahmaṇyāḥ satyavādinaḥ | teṣāṃ māṃ māninīṃ bhāryā sūtaputraḥ padāvadhīt ||
যাঁরা সদা দান করেন, কখনও ভিক্ষা চান না, ব্রাহ্মণভক্ত ও সত্যবাদী—তাঁদেরই মানিনী পত্নী আমি; আমাকে রথচালকের পুত্র লাথি মেরেছে।
वैशम्पायन उवाच