भीष्मकृतः पाण्डवपक्ष-महारथ-प्रशंसा
Bhishma’s appraisal of Pandava-aligned chariot-warriors
एषां द्वैधं समुत्पन्नं योधानां युधि भारत । तेजोवधो न: क्रियते प्रत्यक्षेण विशेषत:,'भारत! इन योद्धाओंमें युद्धूके अवसरपर दुविधा उत्पन्न हो गयी है। तुम प्रत्यक्ष देख रहे हो, हमारे तेज और उत्साहकी विशेषरूपसे हत्या की जा रही है
হে ভারত! যুদ্ধের সময় এই যোদ্ধাদের মধ্যে দ্বিধা জন্মেছে। তুমি প্রত্যক্ষই দেখছ—আমাদের তেজ ও উদ্যম বিশেষভাবে ক্ষুণ্ণ করা হচ্ছে।
भीष्म उवाच