स्त्रीपर्व — गान्धारीभीमसेनसंवादः
Strī-parva — Gāndhārī–Bhīmasena Dialogue on Wartime Conduct
शिक्षयाभ्यधिकं ज्ञात्वा चरन्तं बहुधा रणे । अधो नाभ्या: प्रह्चतवांस्तन्मे कोपमवर्धयत्,परंतु महामना भीमसेनने गदायुद्धके लिये दुर्योधनको बुलाकर श्रीकृष्णके देखते-देखते उसके प्रति जो बर्ताव किया है, वह मुझे अच्छा नहीं लगा। वह रणभूमिमें अनेक प्रकारके पैंतरे दिखाता हुआ विचर रहा था; अतः शिक्षामें उसे अपनेसे अधिक जान भीमने जो उसकी नाभिसे नीचे प्रहार किया, इनके इसी बर्तावने मेरे क्रोधको बढ़ा दिया है
śikṣayābhyadhikaṃ jñātvā carantaṃ bahudhā raṇe | adho nābhyāḥ prahṛtavāṃs tan me kopam avardhayat |
বৈশম্পায়ন বললেন—রণক্ষেত্রে তাকে নানাভাবে চলতে দেখে, এবং জেনে যে সে শিক্ষায় নিজের চেয়ে শ্রেষ্ঠ, ভীম তার নাভির নীচে আঘাত করল; সেই কাজই আমার ক্রোধ বাড়িয়ে দিল।
वैशम्पायन उवाच