अरण्यवृत्ति-वैराग्योपदेशः | Forest Discipline and the Program of Non-Attachment
एवमारण्यशास्त्राणामुग्रमुग्रतरं विधिम् । सेवमान: प्रतीक्षिष्ये देहस्यास्य समापनम्,इस प्रकार वनवासी मुनियोंके लिये शास्त्रमें बताये हुए कठोर-से-कठोर नियमोंका पालन करता हुआ इस शरीरकी आयु समाप्त होनेकी बाट देखता रहूँगा
evam āraṇyaśāstrāṇām ugram ugrataraṁ vidhim | sevamānaḥ pratīkṣiṣye dehasyāsya samāpanam ||
এইভাবে অরণ্যবাসী মুনিদের জন্য শাস্ত্রে নির্দিষ্ট সর্বাধিক কঠোর—আরও কঠোরতর—বিধি পালন করে আমি এই দেহের আয়ুসমাপ্তির প্রতীক্ষা করব।
युधिछिर उवाच