भेदाद् विनाश: संघानां संघमुख्योडसि केशव । यथा त्वां प्राप्य नोत्सीदेदयं संघस्तथा कुरु,केशव! आप इस यादवसंघके मुखिया हैं। यदि इसमें फूट हो गयी तो इस समूचे संघका विनाश हो जायगा; अतः आप ऐसा करें जिससे आपको पाकर इस संघका--इस यादवगणततन्त्र राज्यका मूलोच्छेद न हो जाय
কেশব! তুমি এই সংঘের প্রধান। সংঘে বিভেদ ঘটলেই তার বিনাশ হয়; অতএব এমন ব্যবস্থা করো, যাতে তোমাকে আশ্রয় করে এই সংঘ ধ্বংসের মুখে না পড়ে, বরং স্থিত ও নিরাপদ থাকে।
नारद उवाच