राजधर्मस्य नवनीतम्—रक्षा, दण्ड, चार, उत्थान
Rājadharma’s ‘Essence’: Protection, Punishment, Intelligence, and Royal Diligence
विशालाक्षश्न भगवान् काव्यश्वैव महातपा: । सहस्राक्षो महेन्द्रश्न तथा प्राचेतसो मनु:,इनके सिवा भगवान् विशालाक्ष, महातपस्वी शुक्राचार्य, सहस्तर नेत्रोंवाले इन्द्र, प्राचेतस मनु, भगवान् भरद्वाज और मुनिवर गौरशिरा--ये सभी ब्राह्मणभक्त और ब्रह्मवादी लोग राजशास्त्रके प्रणेता हैं, ये सब राजाके लिये प्रजापालनरूप धर्मकी ही प्रशंसा करते हैं। धर्मात्माओंमें श्रेष्ठ कमलनयन युधिष्ठिर! इस रक्षात्मक धर्मके साधनोंका वर्णन करता हूँ, सुनो
bhīṣma uvāca |
viśālākṣaś ca bhagavān kāvyaś caiva mahātapāḥ |
sahasrākṣo mahendraś ca tathā prācetaso manuḥ ||
ভীষ্ম বললেন—এদের অতিরিক্ত ভগবান বিশালাক্ষ, মহাতপস্বী কাব্য (শুক্রাচার্য), সহস্রনয়ন মহেন্দ্র (ইন্দ্র) এবং প্রাচেতস মনু—এঁরা সকলেই ব্রাহ্মণভক্ত, ব্রহ্মবাদী এবং রাজশাস্ত্রের প্রণেতা বলে গণ্য। তাঁরা রাজাদের জন্য প্রজাপালনরূপ ধর্মকেই সর্বাধিক প্রশংসা করেন। পদ্মনয়ন, ধর্মাত্মাদের মধ্যে শ্রেষ্ঠ যুধিষ্ঠির! এখন আমি এই রক্ষাধর্মের উপায়সমূহ বর্ণনা করছি—শোনো।
भीष्म उवाच