इस प्रकार श्रीमह्ाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वनें युधिष्ठिरको आश्वासनविषयक पचपनवाँ अध्याय पूरा हुआ,इदं ते दुष्करं राजन्निदं ते दुष्टचेष्टितम् । इत्येवं सुह्दो वाचं वदन्ते परिषद्गता:
“হে রাজন! এ কাজ আপনার পক্ষে কঠিন; আর আপনার এই আচরণ অত্যন্ত নিন্দনীয়”—এভাবে সভায় বসে থাকা লোকেরা বন্ধুর মতো কথা বলতে থাকে।
वैशम्पायन उवाच