राजधर्मप्रश्नः — Yudhiṣṭhira’s Inquiry into Rājadharma (Śānti-parva 56)
भीष्म उवाच नमो धर्माय महते नम: कृष्णाय वेधसे । ब्राह्मुणेभ्यो नमस्कृत्य धर्मान् वक्ष्यामि शाश्वतान्,भीष्मजीने कहा--महान् धर्मको नमस्कार है। विश्वविधाता भगवान् श्रीकृष्णको नमस्कार है। अब मैं ब्राह्मणोंको नमस्कार करके सनातन धर्मोंका वर्णन आरम्भ करूँगा
ভীষ্ম বললেন— মহাধর্মকে নমস্কার, বিশ্ববিধাতা কৃষ্ণকে নমস্কার। ব্রাহ্মণদের প্রণাম করে আমি এখন শাশ্বত ধর্মসমূহের বর্ণনা করব।
भीष्म उवाच