Yudhiṣṭhira’s Post-Accession Settlements and Approach to Vāsudeva (युधिष्ठिरस्य राज्यस्थापनं वासुदेवाभिगमनं च)
धृतराष्ट्राय तद् राज्यं गान्धार्य विदुराय च । निवेद्य सुस्थवद् राजा सुखमास्ते युधिछिर:,नृपश्रेष्ठ महायशस्वी राजा युधिष्ठिरने इस प्रकार प्राप्त हुए धनका यथोचित विभाग करके उसकी शान्ति की तथा युयुत्सु एवं धृतराष्ट्रका विशेष सत्कार किया। धुृतराष्टर, गान्धारी तथा विदुरजीकी सेवामें अपना सारा राज्य समर्पित करके राजा युधिष्छिर स्वस्थ एवं सुखी हो गये
vaiśampāyana uvāca | dhṛtarāṣṭrāya tad rājyaṃ gāndhāryai vidurāya ca | nivedya susthavad rājā sukham āste yudhiṣṭhiraḥ ||
ধৃতরাষ্ট্র, গান্ধারী ও বিদুরের হাতে সেই রাজ্য অর্পণ করে—যেন তাঁদের তত্ত্বাবধানে রেখে—রাজা যুধিষ্ঠির সুস্থচিত্তে শান্তিতে সুখে বাস করলেন।
वैशम्पायन उवाच