दानपात्रापात्र-निर्णयः / Determining Worthy Gifts, Recipients, and Permissible Food
तथा स्वलंकृतद्ारं नगरं पाण्डुनन्दन: । स्तूयमान: शुभैर्वाक्यै: प्रविवेश सुहृददूवृत:,अपने सुहृदोंसे घिरे हुए पाण्डुनन्दन युधिष्ठिरने इस प्रकार सजे सजाये द्वारवाले नगर --हस्तिनापुरमें प्रवेश किया। उस समय सुन्दर वचनोंद्वारा उनकी स्तुति की जा रही थी
এভাবে সুসজ্জিত দ্বারবিশিষ্ট নগরে পাণ্ডুনন্দন যুধিষ্ঠির সুহৃদদের পরিবেষ্টিত হয়ে প্রবেশ করলেন। তখন মঙ্গলময় বাক্যে তাঁর প্রশংসা করা হচ্ছিল।
वैशम्पायन उवाच