Atithi-satkāra and the Consolation of Wise Counsel (अतिथिसत्कारः प्रज्ञानवचनस्य च पराश्वासनम्)
नारायण: स विश्वात्मा तेनास्य शितिकण्ठता । यह देख रुद्र तपस्यामें लगे हुए उन ऋषियोंपर टूट पड़े। तब विश्वात्मा नारायणने अपने हाथसे उन आक्रमणकारी रुद्रदेवका गला पकड़ लिया। इसीसे उनका कण्ठ नीला हो जानेके कारण वे “नीलकण्ठ' के नामसे प्रसिद्ध हुए
nārāyaṇaḥ sa viśvātmā tenāsya śitikaṇṭhatā |
তপস্যায় রত ঋষিদের উপর রুদ্র আক্রমণ করতে উদ্যত হলে, বিশ্বাত্মা নারায়ণ তাঁর হাতে আক্রমণকারী রুদ্রের কণ্ঠ চেপে ধরলেন। সেই ধরায় তাঁর কণ্ঠ নীলবর্ণ হয়ে গেল; তাই তিনি ‘নীলকণ্ঠ’ নামে প্রসিদ্ধ হলেন।
तामिन्द्र उवाच गच्छ नहुषस्त्वया वाच्योथ<पूर्वेण मामृषियुक्तेन यानेन त्वमधिरूढ