Atithi-prāpti and the Brāhmaṇa’s Deliberation on Triadic Dharma (अतिथिप्राप्तिः धर्मत्रयविचारश्च)
युगे युगे भविष्यध्व॑ प्रवृत्तिफलभागिन: । “'देवताओ! मेरी कृपासे तुम्हारा ऐसा ही लक्षण होगा। तुम प्रत्येक युगमें उत्तम दक्षिणाओंसे संयुक्त यज्ञोंद्वारा यजन करके प्रवृत्तिरूप धर्मफलके भागी होओगे || ६० ई ।।
হে দেবগণ! যুগে যুগে তোমরা প্রবৃত্তি-রূপ ধর্মফলের অংশীদার হবে; আর সর্বলোকেই দেবতারা যজ্ঞের দ্বারা যজন করবে।
वैशम्पायन उवाच