देवतापितृप्रश्नः — Nārada at Badarīāśrama: the ultimate referent of daiva and pitṛ worship
श्वः कार्यमद्य कुर्वीत पूर्वाह्न चापराह्निकम् । न हि प्रतीक्षते मृत्यु: कृतं वास्य न वाकृतम्,जो काम कल करना हो, उसे आज ही कर लेना चाहिये और जो दोपहर- बाद करना हो, उसे पहले ही पहरमें पूरा कर डालना चाहिये; क्योंकि मौत यह नहीं देखती कि इसका काम पूरा हुआ है या नहीं
যে কাজ কাল করার কথা, তা আজই করে ফেল; আর যে কাজ অপরাহ্ণে করার কথা, তা পূর্বাহ্ণেই সম্পন্ন কর। কারণ মৃত্যু অপেক্ষা করে না—কাজ হলো কি হলো না।
व्यास उवाच