देवतापितृप्रश्नः — Nārada at Badarīāśrama: the ultimate referent of daiva and pitṛ worship
प्रयायतां किमास्यते समुत्थितं महद् भयम् । अतिप्रमाथि दारुणं सुखस्य संविधीयताम्,वत्स! चुपचाप क्यों बैठे हो? जल्दीसे आगे बढ़ो। तुम्हारे ऊपर हृदयको अत्यन्त मथ डालनेवाला, भयंकर एवं महान् भय उठ खड़ा हुआ है; अतः परमानन्दकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करो
বৎস! নীরবে কেন বসে আছ? শীঘ্রই এগিয়ে চলো। তোমার উপর হৃদয়কে প্রবলভাবে মথিত করে এমন ভয়ংকর ও মহাভয় উঠে দাঁড়িয়েছে; অতএব পরমানন্দ লাভের জন্য সাধনা করো।
व्यास उवाच