अव्यक्त–पुरुष–विवेकः (Discrimination of Avyakta/Prakṛti and Puruṣa) — Yājñavalkya’s Anvīkṣikī to Viśvāvasu
अनुलोमेन जायन्ते लीयन्ते प्रतिलोमत: । गुणा गुणेषु सततं सागरस्योर्मयो यथा,जैसे समुद्रसे उठी हुई लहरें फिर उसीमें शान्त हो जाती हैं, उसी प्रकार सम्पूर्ण गुण (तत्त्व) सदा अनुलोमक्रमसे उत्पन्न होते और विलोमक्रमसे अपने कारणभूत गुणों (तत्त्व) में ही लीन हो जाते हैं
অনুলোম ক্রমে তত্ত্বসমূহ জন্মায় এবং প্রতিলোম ক্রমে লীন হয়। যেমন সাগরের তরঙ্গ উঠে আবার সেই সাগরেই শান্ত হয়, তেমনি গুণসমূহ সর্বদা নিজ নিজ কারণভূত গুণেই বিলীন হয়।
वसिष्ठ उवाच