अव्यक्तकालमान-निर्णयः
Measures of Time from the Unmanifest; Creation, Elements, and the Primacy of Mind
वाक्सायका वदनान्निष्पतन्ति यैराहत: शोचति रात्र्यहानि । परस्य नामर्मसु ते पतन्ति तान् पण्डितो नावसूजेत् परेषु,वचनरूपी बाण जब मुहसे निकल पड़ते हैं, तब उनके द्वारा बींधा गया मनुष्य रात-दिन शोकमें डूबा रहता है; क्योंकि वे दूसरोंके मर्मपर आघात पहुँचाते हैं, इसलिये विद्धान् पुरुषको किसी दूसरे मनुष्यपर वाग्बाणका प्रयोग नहीं करना चाहिये
vāksāyakā vadanān niṣpatanti yair āhataḥ śocati rātryahāni | parasya nāmarmasu te patanti tān paṇḍito nāvasūjet pareṣu ||
হংস বলল—বাক্য হলো তীর, যা মুখ থেকে ছুটে যায়; তাতে বিদ্ধ হলে মানুষ রাতদিন শোকে ডুবে থাকে। সেগুলি অপরের মর্মস্থলে আঘাত করে; তাই পণ্ডিত ব্যক্তি অন্যের প্রতি এমন বাক্যতীর নিক্ষেপ করবে না।
हंस उवाच