अव्यक्त-प्रबोधः (Awakening to the Unmanifest): The 25th and 26th Principles and Eligibility for Brahma-vidyā
पराशर उवाच प्रतिग्रहो याजनं च तथैवाध्यापनं नृप । विशेषधर्मा विप्राणां रक्षा क्षत्रस्य शोभना,पराशरजीने कहा--राजन! दान लेना, यज्ञ कराना तथा विद्या पढ़ाना--ये ब्राह्मणोंके विशेष धर्म हैं (जो उनकी जीविकाके साधन हैं)। प्रजाकी रक्षा करना क्षत्रियके लिये श्रेष्ठ धर्म है
পরাশর বললেন—হে নৃপ! দান গ্রহণ, যজ্ঞ করানো এবং অধ্যাপন—এগুলো ব্রাহ্মণদের বিশেষ ধর্ম। প্রজার রক্ষা করা ক্ষত্রিয়ের শোভন ধর্ম।
पराशर उवाच