स्वर्गायाभिमुख: प्रायाललोकानां हितकाम्यया । सा विनि:सरमाणं तु दृष्टवा शक्रं महौजसम्,कुरुनन्दन! उस समय वृत्रविनाशक इन्द्र लोक-हितकी कामनासे स्वर्गकी ओर जा रहे थे। महातेजस्वी इन्द्रको युद्धभूमिसे निकलकर जाते देख ब्रह्महत्या कुछ ही कालमें उनके पास जा पहुँची
লোককল্যাণের কামনায় ইন্দ্র স্বর্গাভিমুখে যাত্রা করলেন। সেই মহৌজস্বী শক্রকে বেরিয়ে যেতে দেখে সে (ব্রহ্মহত্যা)ও তার পিছু নিল।
भीष्म उवाच