भूयांसो हृदये ये मे प्रश्नास्ते व्याह्ृतास्त्वया । इदं त्वन्यत् प्रवक्ष्यामि न राजन् निग्रहादिव,मेरे हृदयमें जो बहुत-से प्रश्न उठे थे, उन सबका निराकरण आपने कर दिया। महाराज! अब मैं यह दूसरा प्रश्न उपस्थित कर रहा हूँ। इसमें जिज्ञासा ही कारण है, दुराग्रह नहीं
আমার হৃদয়ে যে বহু প্রশ্ন উঠেছিল, আপনি সেগুলির উত্তর দিয়েছেন। মহারাজ! এখন আমি আর-একটি প্রশ্ন নিবেদন করছি; এতে কৌতূহলই কারণ, জেদ নয়।
युधिछिर उवाच