Brahmacarya-Upāya: Jñāna, Śauca, and the Mind’s Role in Desire (शान्ति पर्व, अध्याय २०७)
कि तु यानि विदुलोकि ब्राह्मणा: शार्ज्र्धन्वनि । माहात्म्यानि महाबाहो शृणु तानि युधिछिर,महाबाहु युधिष्ठिर! जगत्में शार्इ्रधनुष धारण करनेवाले श्रीकृष्णके जिन माहात्म्योंको ब्राह्मणलोग जानते हैं, उन्हें बताता हूँ, सुनो
kiṃ tu yāni viduloke brāhmaṇāḥ śārṅgadhanvani | māhātmyāni mahābāho śṛṇu tāni yudhiṣṭhira ||
কিন্তু হে মহাবাহু যুধিষ্ঠির! জগতে শার্ঙ্গধনু ধারণকারী শ্রীকৃষ্ণের যে যে মাহাত্ম্য ব্রাহ্মণগণ জানেন, সেগুলি আমি বর্ণনা করছি—শোনো।
भीष्म उवाच