अध्याय १५२: लोभः पापस्य मूलम् — Greed as the Root of Wrongdoing
तत्तु शल्यमनिह््त्य कथं शक्ष्यामि जीवितुम् । सर्व मन्युं विनीय त्वमभि मां वद शौनक,“निश्चय ही मुझे यमराजसे भी घोर भय प्राप्त होनेवाला है, यह बात मेरे हृदयमें काँटेकी भाँति चुभ रही है। अपने हृदयसे इसको निकाले बिना मैं कैसे जीवित रह सकूँगा? अतः शौनकजी! आप समस्त क्रोधका त्याग करके मुझे उद्धारका कोई उपाय बताइये
tattu śalyam anihṛtya kathaṃ śakṣyāmi jīvitum | sarvaṃ manyuṃ vinīya tvam abhi māṃ vada śaunaka ||
কিন্তু সেই কাঁটা না তুললে আমি কীভাবে বেঁচে থাকব? হে শৌনক, সমস্ত ক্রোধ সংবরণ করে আমাকে বলুন—উদ্ধারের উপায় কী।
भीष्म उवाच