Śaraṇāgata-Atithi-Dharma in the Kapota Narrative (कपोत-आख्यानम्—शरणागतधर्मः)
भीष्म उवाच एवमुक््त्वा निववृते मातड्र: कौशिकं तदा । विश्वामित्रो जहारैव कृतबुद्धि: श्वजाघनीम्,भीष्मजी कहते हैं--युधिष्ठि!! ऐसा कहकर चाण्डाल मुनिको मना करनेके कार्यसे निवृत्त हो गया। विश्वामित्र तो उसे लेनेका निश्चय कर चुके थे; अतः कुत्तेकी जाँघ ले ही गये
ভীষ্ম বললেন—যুধিষ্ঠির! এ কথা বলে মাতঙ্গ শ্বপচ তখন কৌশিক (বিশ্বামিত্র)কে নিবৃত্ত করতে আর চেষ্টা করল না। কিন্তু বিশ্বামিত্র তো গ্রহণের সংকল্প করে ফেলেছিলেন; তাই তিনি কুকুরের ঊরু (জঙ্ঘা) তুলে নিয়ে গেলেন।
भीष्म उवाच