Vyāghra–Gomāyu Saṃvāda (व्याघ्रगोमायु संवाद) — Testing Character Beneath Appearances
अगृह्ानुनयं तस्य मृगेन्द्रस्य च बुद्धिमान् । गोमायु: प्रायमास्थाय त्यक्त्वा देहं दिवं ययौ,वह बड़ा बुद्धिमान् था; अतः शेरकी अनुनय-विनय न मानकर मृत्युपर्यन्त निराहार रहनेका व्रत ले एक स्थानपर बैठ गया और अन्तमें शरीर त्यागकर स्वर्गधाममें जा पहुँचा
সে ছিল অতিশয় বুদ্ধিমান; তাই মৃগেন্দ্র (সিংহ)-এর অনুনয়-বিনয় গ্রহণ না করে সে মৃত্যুপৰ্যন্ত উপবাসের ব্রত নিল, এক স্থানে বসে রইল এবং শেষে দেহ ত্যাগ করে স্বর্গলোকে গমন করল।
भीष्म उवाच