Satya–Anṛta Viveka (Discrimination between Truth and Falsehood) | सत्य–अनृत विवेकः
भीष्म उवाच सत्यस्य वचन साधु न सत्याद् विद्यते परम् यत्तु लोकेषु दुर्जञानं तत् प्रवक्ष्यामि भारत,भीष्मजीने कहा--भारत! सत्य बोलना अच्छा है। सत्यसे बढ़कर दूसरा कोई धर्म नहीं है; परतु लोकमें जिसे जानना अत्यन्त कठिन है, उसीको मैं बता रहा हूँ
bhīṣma uvāca | satyasya vacanaṃ sādhu na satyād vidyate param | yat tu lokeṣu durjñānaṃ tat pravakṣyāmi bhārata ||
ভীষ্ম বললেন— হে ভারত! সত্য বলা মহৎ; সত্যের ঊর্ধ্বে আর কিছু নেই। কিন্তু জগতে যা জানা অত্যন্ত দুরূহ, সেই কথাই আমি তোমাকে বলছি।
भीष्म उवाच