भীমेन युधिष्ठिरस्य त्यागवृत्तेः प्रतिषेधः
Bhīma’s Rebuttal of Yudhiṣṭhira’s Renunciatory Inclination
अवेक्षस्व यथा स्वै: स्वै: कर्मभिव्यापृतं जगत् । तस्मात् कर्मव कर्तव्यं नास्ति सिद्धिरकर्मण:,देखिये और विचार कीजिये कि सारा संसार किस तरह अपने कर्मोमें लगा हुआ है; अत: आपको भी क्षत्रियोचित कर्तव्यका ही पालन करना चाहिये। जो कर्मोंको छोड़ बैठता है, उसे कभी सिद्धि नहीं मिलती
avekṣasva yathā svaiḥ svaiḥ karmabhir vyāpṛtaṃ jagat | tasmāt karmaiva kartavyaṃ nāsti siddhir akarmaṇaḥ ||
দেখো ও বিবেচনা করো—সমগ্র জগৎ কীভাবে প্রত্যেকে নিজের নিজের কর্মে নিয়োজিত। অতএব তোমাকেও তোমার ধর্ম, ক্ষত্রিয়োচিত কর্তব্য, অবশ্যই পালন করতে হবে; কর্ম ত্যাগ করলে কখনো সিদ্ধি হয় না।
भीम उवाच