रणभूमिवर्णनम् — Devāsuropama-yuddha and the ‘River’ Metaphor of the Battlefield
यो होक: पाण्डवैर्युध्येद् यो वा युध्यन्तमुत्सूजेत् । स पज्चभिर्भवेद् युक्त: पातकैश्नोपपातकै:,“हमलोगोंमेंसे कोई एक योद्धा अकेला रहकर किसी तरह भी पाण्डवोंके साथ युद्ध न करे। जो अकेला ही पाण्डवोंके साथ युद्ध करेगा अथवा जो पाण्डवोंके साथ जूझते हुए वीरको अकेला छोड़ देगा, वह पाँच पातकों और उपपातकोंसे युक्त होगा
yo hokaḥ pāṇḍavair yudhyed yo vā yudhyantam utsṛjet | sa pañcabhir bhaved yuktaḥ pātakaiś copapātakaiḥ ||
আমাদের মধ্যে যে কেউ পাণ্ডবদের সঙ্গে একা যুদ্ধ করে, অথবা যে পাণ্ডবদের সঙ্গে লড়াইরত কোনো বীরকে পরিত্যাগ করে, সে পাঁচ মহাপাতক ও উপপাপের দোষে কলুষিত হয়।
संजय उवाच