वे घोर तपस्यासे युक्त महाभागा तपस्विनी गान्धारी देवीका चिन्तन करने लगे। उन्होंने सोचा “गान्धारी देवी कुपित होनेपर तीनों लोकोंको जलाकर भस्म कर सकती हैं' ।। तस्य चिन्तयमानस्य बुद्धि: समभवत् तदा | गान्धार्या: क्रोधदीप्ताया: पूर्व प्रशमनं भवेत्
এভাবে চিন্তা করতে করতে তখন তার বুদ্ধিতে উদয় হল—ক্রোধে দীপ্ত গান্ধারী দেবীকে আগে শান্ত করাই উচিত।
वैशम्पायन उवाच