शल्यस्य सेनापत्याभ्युपगमः | Śalya’s Acceptance of Command
पञठ्चमो<ध्याय: दुर्योधनका कृपाचार्यको उत्तर देते हुए सन्धि स्वीकार न करके युद्धका ही निश्चय करना संजय उवाच एवमुक्तस्ततो राजा गौतमेन तपस्विना । नि:श्वस्य दीर्घमुष्णं च तृष्णीमासीदू विशाम्पते,संजय कहते हैं--प्रजानाथ! तपस्वी कृपाचार्यके ऐसा कहनेपर दुर्योधन जोर-जोरसे गरम साँस खींचता हुआ कुछ देरतक चुपचाप बैठा रहा
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সঞ্জয় বললেন—তপস্বী গৌতম (কৃপাচার্য) এভাবে বললে প্রজানাথ রাজা দুর্যোধন দীর্ঘ, উত্তপ্ত নিশ্বাস ফেলে কিছুক্ষণ নীরব রইল।
संजय उवाच