Baka Dālbhya at Avakīrṇa-tīrtha: Rāṣṭra-kṣaya and Release through Prasāda (Śalya-parva, Adhyāya 40)
अस्मिंस्तीर्थे महानद्या अद्यप्रभृति मानव: । आप्लुतो वाजिमेधस्य फल प्राप्स्यति पुष्कलम्,“आजसे जो मनुष्य महानदी सरस्वतीके इस तीर्थमें स्नान करेगा, उसे अश्वमेध-यज्ञका सम्पूर्ण फल प्राप्त होगा। आजसे इस तीर्थमें किसीको सर्पसे भय नहीं होगा। थोड़े समयतक ही इस तीर्थके सेवनसे मनुष्यको बहुत अधिक फल प्राप्त होगा”
asmiṁs tīrthe mahānadyā adyaprabhṛti mānavaḥ | āpluto vājimedhasya phalaṁ prāpsyati puṣkalam ||
“আজ থেকে মহানদীর এই তীর্থে যে মানুষ স্নান করবে, সে অশ্বমেধ যজ্ঞের পূর্ণ ও প্রাচুর্যপূর্ণ ফল লাভ করবে।”
वैशग्पायन उवाच