द्वैपायनह्रदे दुर्योधनान्वेषणम् / The Search for Duryodhana at Dvaipāyana Lake
शयनीयानि शुभ्राणि स्पर्थ्यास्तरणवन्ति च । समादाय ययुस्तूर्ण नगरं दाररक्षिण:,प्रजानाथ! उनके साथ हाथोंमें बेंतकी छड़ी लिये द्वारपाल भी चल रहे थे। रानियोंकी रक्षामें नियुक्त हुए सेवक शुभ्र एवं बहुमूल्य बिछौने लेकर शीघ्रतापूर्वक नगरकी ओर चलने लगे
śayanīyāni śubhrāṇi spṛthyāstaraṇavanti ca | samādāya yayus tūrṇaṁ nagaraṁ dārarakṣiṇaḥ ||
উজ্জ্বল শয্যা ও মূল্যবান আচ্ছাদন-প্রস্তর তুলে নিয়ে নারীদের রক্ষায় নিযুক্ত সেবকেরা দ্রুত নগরের দিকে গেল; আর তাদের সঙ্গে হাতে বেত ধরা দ্বারাধ্যক্ষরাও চলল—শৃঙ্খলা ও নিরাপত্তা বজায় রেখে।
संजय उवाच