तांस्तानन्यान् महेष्वासान् साश्वान् सरथकूबरान् | अर्दयामास विशिखैरुल्काभिरिव कुञ्जरान्,जैसे शिकारी जलते हुए काष्ठोंसे हाथियोंको पीड़ा देते हैं, उसी प्रकार वे दूसरे-दूसरे महाधनुर्धर वीरोंको भी घोड़े, रथ और कूबरोंसहित अपने बाणोंद्वारा पीड़ित करने लगे
যেমন শিকারি জ্বলন্ত কাঠ দিয়ে হাতিদের যন্ত্রণা দেয়, তেমনই সে তীক্ষ্ণ বাণে ঘোড়াসহ, রথ-কूबरসহ সেই সব মহাধনুর্ধর বীরদের একে একে বিদীর্ণ করে পীড়িত করতে লাগল।
संजय उवाच