अध्याय ९ — दुर्योधनस्य अन्त्यावस्था, विलापः, तथा सौप्तिक-प्रतिवृत्तम्
Duryodhana’s Final Condition, Lamentation, and the Night’s Report
प्राणानुपासृजद् वीर: सुहृदां दुःखमुत्सूजन् । अपाक्रामद् दिवं पुण्यां शरीरं क्षितिमाविशत्,“तुम सब लोगोंका कल्याण हो। तुम्हें सुख प्राप्त हो। अब स्वर्गमें ही हमलोगोंका पुनर्मिलन होगा।/ ऐसा कहकर महामनस्वी वीर कुरुराज दुर्योधन चुप हो गया और अपने सुहृदोंके लिये दुःख छोड़कर उसने अपने प्राण त्याग दिये। वह स्वयं तो पुण्यधाम स्वर्गलोकमें चला गया; किंतु उसका पार्थिव शरीर इस पृथ्वीपर ही पड़ा रह गया
prāṇān upāsṛjad vīraḥ suhṛdāṁ duḥkham utsṛjan | apākrāmad divaṁ puṇyāṁ śarīraṁ kṣitim āviśat ||
বীরটি সুহৃদদের দুঃখ ত্যাগ করে প্রাণ ত্যাগ করল। সে পুণ্যস্বর্গে গমন করল, আর তার দেহ পৃথিবীতেই রয়ে গেল।
संजय उवाच