Daiva–Puruṣakāra Saṃvāda
Kṛpa’s Counsel on Destiny and Human Effort
चेष्टामकुर्वल्लैभते यदि किंचिद् यदृच्छया । यो वा न लभते कृत्वा दुर्दर्शा तावुभावषि,यदि कोई पुरुषार्थ न करके दैवेच्छासे ही कुछ पा जाता है अथवा जो पुरुषार्थ करके भी कुछ नहीं पाता, इन दोनों प्रकारके मनुष्योंका मिलना बहुत कठिन है
ceṣṭām akurvan laibhate yadi kiñcid yadṛcchayā | yo vā na labhate kṛtvā durdarśā tāv ubhāv api ||
কৃপাচার্য বললেন—যদি কেউ চেষ্টা না করেও দৈবক্রমে কিছু পেয়ে যায়, অথবা কেউ চেষ্টা করেও কিছু না পায়—এই দুই প্রকার মানুষের দেখা পাওয়া অত্যন্ত দুর্লভ।
कृप उवाच