तद्धेमजालावततं सुघोषं जाज्वल्यमानं निपपात भूमौ,सोनेकी जालीसे व्याप्त वह जगमगाता हुआ मुकुट धमाकेकी आवाजके साथ धरतीपर जा गिरा। जैसे अस्ताचलसे लाल रंगके मण्डलवाला सूर्य नीचे गिरता है, उसी प्रकार पार्थका वह प्रिय, उत्तम एवं तेजस्वी किरीट पूर्वोक्त श्रेष्ठ बाणसे मथित और विषाग्निसे प्रज्वलित हो पृथ्वीपर गिर पड़ा
tad-dhema-jālāvata-taṁ sughoṣaṁ jājvalyamānaṁ nipapāta bhūmau |
সঞ্জয় বললেন—সোনার জালে আবৃত, গম্ভীর ধ্বনি তুলতে তুলতে এবং জ্বলন্ত দীপ্তিতে দগ্ধমান সেই মুকুট ভূমিতে আছড়ে পড়ল। পূর্বোক্ত শ্রেষ্ঠ বাণে বিদ্ধ হয়ে, যেন বিষাগ্নিতে প্রজ্বলিত, পার্থের প্রিয়, উৎকৃষ্ট ও দীপ্তিমান কিরীট পৃথিবীতে এমনভাবে পড়ল—যেমন অস্তাচলের ওপারে লাল বৃত্তধারী সূর্য অস্ত যায়।
संजय उवाच