अध्याय ९ — कर्णस्य प्रहारः, योधयुग्मनियोजनम्, शैनेय-कैकेययोर्युद्धविन्यासः
न चेदस्त्राणि निर्णेशु: स कथं निहतः परे: । यदि उसका रथ नहीं टूट गया था, धनुषके टुकड़े-टुकड़े नहीं हो गये थे और अस्त्र नहीं नष्ट हुए थे, तब शत्रुओंने उसे किस प्रकार मार दिया?
na ced astrāṇi nirṇeśuḥ sa kathaṃ nihataḥ paraiḥ |
বৈশম্পায়ন বললেন— যদি তার অস্ত্রগুলি নিষ্ফল না হত, তবে শত্রুরা তাকে কীভাবে বধ করতে পারত? যদি তার রথ ভাঙেনি, ধনুক খণ্ড-বিখণ্ড হয়নি এবং নিক্ষেপাস্ত্র নষ্ট না হয়ে থাকে, তবে কোন উপায়ে বৈরীরা তাকে হত্যা করল?
वैशम्पायन उवाच