एते5भवन्नर्जुनतः क्षुद्रसर्पाश्न॒ कर्णत: । महाराज! मुनि, चारण, सिद्ध, गरुड़, पक्षी, रत्न, निधियाँ, उपवेद, उपनिषद्, रहस्य, संग्रह और इतिहास-पुराणसहित सम्पूर्ण वेद, वासुकि, चित्रसेन, तक्षक, मणिक, सम्पूर्ण सर्पगण, अपने वंशजोंसहित कद्रूकी संतानें, विषैले नाग, ऐरावत, सौरभेय और वैशालेय सर्प--ये सब अर्जुनके पक्षमें हो गये। छोटे-छोटे सर्प कर्णका साथ देने लगे || ४१--४४ ई || ईहामृगा व्यालमृगा माड्ल्याश्न मृगद्धिजा:
sañjaya uvāca |
ete ’bhavann arjunataḥ kṣudra-sarpāś ca karṇataḥ ||
সঞ্জয় বললেন—সেই সময় ক্ষুদ্র ক্ষুদ্র নাগেরা অর্জুনের পক্ষে এসে দাঁড়াল, আর অন্য কতক কর্ণের পক্ষে যোগ দিল। এভাবে নাগদের মধ্যেও দলভেদ হল—কেউ অর্জুনকে, কেউ রাধেয় কর্ণকে অনুসরণ করল; যেমন যুদ্ধে শক্তি, ভাগ্য ও পূর্ব-সম্পর্ক দেখে পক্ষ বদলে যায়, একটিমাত্র স্থির আনুগত্যে নয়।
संजय उवाच