(पश्यस्व पश्यस्व विशोक मे त्व॑ बल॑ परेषामभिघातभिन्नम् । नानास्वरान् पश्य विमुच्य सर्वे तथा द्रवन्ते बलिनो धार्तराष्ट्रा: ।।) विशोक! देखो, देखो, मेरा बल। मेरे आघातोंसे शत्रुओंकी सेना विदीर्ण हो उठी है। देखो, धृतराष्ट्रके सभी बलवान पुत्र नाना प्रकारके आर्तनाद करते हुए भागने लगे हैं। ईक्षस्वैतां भारतीं दीर्यमाणा- मेते कस्माद् विद्रवन्ते नरेन्द्रा: । व्यक्त धीमान् सव्यसाची नराग्रय: सैन्यं होतच्छादयत्याशु बाणै:,सारथे! इस कौरव-सेनापर तो दृष्टिपात करो। इसमें भी दरार पड़ती जा रही है। ये राजालोग क्यों भाग रहे हैं? इससे तो स्पष्ट जान पड़ता है कि बुद्धिमान् नरश्रेष्ठ अर्जुन आ गये। वे ही अपने बाणोंद्वारा शीघ्रता-पूर्वक इस सेनाको आच्छादित कर रहे हैं
bhīmasena uvāca | paśyasva paśyasva viśoka me tvaṁ balaṁ pareṣām abhighātabhinnam | nānāsvarān paśya vimucya sarve tathā dravante balino dhārtarāṣṭrāḥ || īkṣasvaitāṁ bhāratīṁ dīryamāṇām ete kasmād vidravante narendrāḥ | vyaktaṁ dhīmān savyasācī narāgryaḥ sainyaṁ hotacchādayaty āśu bāṇaiḥ ||
ভীমসেন বললেন—“বিশোক, দেখো—দেখো আমার শক্তি। আমার আঘাতে শত্রুসেনা বিদীর্ণ হয়েছে। দেখো, ধৃতরাষ্ট্রের সব বলবান পুত্র নানা স্বরে আর্তনাদ করতে করতে পালিয়ে যাচ্ছে। এই কৌরব-সেনার দিকে তাকাও—এখনও তা ফেটে যাচ্ছে। এই রাজারা কেন ছুটছে? স্পষ্টই বোঝা যায়, বুদ্ধিমান নরশ্রেষ্ঠ সব্যসাচী অর্জুন এসে পড়েছেন; তিনি দ্রুত তাঁর বাণে এই যুদ্ধক্ষেত্র আচ্ছাদিত করছেন।”
भीमसेन उवाच