भवत्सकाशे वक्ष्ये च पुनरेवात्मसंस्तवम्,“मैं आपके निकट पुनः अपनी प्रशंसासे भरी हुई बात कहता हूँ, धनुर्वेदमें मेरी समानता करनेवाला इस संसारमें दूसरा कोई नहीं है। फिर पराक्रममें मेरे-जैसा कौन है? मेरे समान क्षमाशील भी दूसरा कौन है तथा क्रोधमें भी मेरे-जैसा दूसरा कोई नहीं है
আপনার সন্নিধানে আমি আবারও আত্মপ্রশংসামিশ্রিত কথা বলছি—ধনুর্বিদ্যায় আমার সমকক্ষ এই জগতে আর কেউ নেই। বীর্যে আমার মতো কে আছে? ক্ষমায়ও আমার সমান আর কে, আর ক্রোধেও আমার মতো আর কেউ নেই।
संजय उवाच