अकाल चतु:ःसप्ततितमो< ध्याय: अर्जुनके वीरोचित उदगार संजय उवाच स केशवस्य बी भत्सु: श्रुत्वा भारत भाषितम् । विशोकः: सम्प्रहृष्टश्न क्षणेन समपद्यत,संजय कहते हैं--भरतनन्दन! भगवान् श्रीकृष्णका यह भाषण सुनकर अर्जुन एक ही क्षणमें शोकरहित एवं हर्ष और उत्साहसे सम्पन्न हो गये
সঞ্জয় বললেন—হে ভরতনন্দন! কেশব শ্রীকৃষ্ণের এই বাক্য শুনে বিভৎসু অর্জুন মুহূর্তেই শোকমুক্ত হয়ে আনন্দ ও উদ্যমে পরিপূর্ণ হলেন।
संजय उवाच