“कृष्णे! पाण्डव तो नष्ट होकर सदाके लिये नरकमें पड़ गये। पृथुश्रोणि! अब तू दूसरा पति वरण कर ले। मृदुभाषिणि! आजसे तू राजा धुृतराष्ट्रकी दासी हुई; अतः राजमहलमें प्रवेश कर। टेढ़ी बरौनियोंवाली कृष्णे! पाण्डव अब तेरे पति नहीं रहे। वे तुझपर किसी तरह कोई अधिकार नहीं रखते ।। दासभार्या च पाज्चालि स्वयं दासी च शोभने । अद्य दुर्योधनो होक: पृथिव्यां नृपति: स्मृत:,'सुन्दरी पांचालराजकुमारी! अब तू दासोंकी भार्या और स्वयं भी दासी है। आज एकमात्र राजा दुर्योधन समस्त भूमण्डलके स्वामी मान लिये गये हैं
sañjaya uvāca | kṛṣṇe! pāṇḍavāḥ te naṣṭāḥ kṛtvā sadā-kṛte narake patitāḥ | pṛthuśroṇi! adhunā tvaṁ dvitīyaṁ patiṁ vṛṇīṣva | mṛdubhāṣiṇi! adya-se tvaṁ rājā dhṛtarāṣṭrasya dāsī bhavasi; ataḥ rāja-mahale praviśa | vakra-bhrū-late kṛṣṇe! pāṇḍavāḥ adhunā tava patayo na santi | te tvayi kathaṁcid api adhikāraṁ na labhante || dāsa-bhāryā ca pāñcālī svayaṁ dāsī ca śobhane | adya duryodhano ekaḥ pṛthivyāṁ nṛpatiḥ smṛtaḥ ||
সঞ্জয় বলল—“হে কৃষ্ণা (দ্রৌপদী)! পাণ্ডবরা বিনষ্ট হয়ে চিরকালের জন্য নরকে পতিত হয়েছে। হে প্রশস্ত-নিতম্বা! এখন অন্য স্বামী বরণ কর। হে মৃদুভাষিণী! আজ থেকে তুমি রাজা ধৃতরাষ্ট্রের দাসী; অতএব রাজপ্রাসাদে প্রবেশ কর। হে বাঁকা ভ্রুযুক্ত কৃষ্ণে! পাণ্ডবরা আর তোমার স্বামী নয়; তোমার উপর তাদের কোনো অধিকার নেই। আর হে শোভনে, হে পাঁচালকন্যা! তুমি এখন দাসদের স্ত্রী এবং নিজেও দাসী; আজ পৃথিবীতে একমাত্র রাজা বলে দুর্যোধনকেই মানা হয়েছে।”
संजय उवाच